यह शब्द अपने घर या समाज में हम अक्सर सुनते रहे होंगे कि "मेरे पास पैसे बनाने की मशीन थोड़ी है ".
बचपन में जब यह बात सुनता था तो मन में यह प्रश्न आता था की पैसे बनाने की मशीन कैसी होती है ? क्यूं आदमी पैसे बनाने की मशीन नहीं खरीद लेता ? क्या मजा होता अगर घर में एक पैसे बनाने वाली मशीन होती, जब मन करता कुछ पैसे निकालते और जो मन करता वो खरीदते फिर किसी ने बताया की पैसे बनाने की मशीन सिर्फ सरकार के पास होती है और कोई पैसे बनाने की मशीन नहीं रख सकता.
एक दिन हमारे घर पर एक गाड़ी रुकी जिस पर लिखा था " भारत सरकार ". उस गाड़ी से उतरे लोगों में से एक से हिम्मत जुटा के मैंने पैसे मांग लिये यह सोच कर के यही सरकार हैं और इन्ही के पास पैसे बनाने की मशीन है. उन्होंने मुझे पैसे तो दे दिए लेकिन बाद में घर में बहुत डांट पड़ी की ऐसे किसी मेहमान से पैसे क्यूँ मांगे ये गलत बात है, वो क्या सोच रहे होंगे ? मेरा जवाब सुन कर लोग हंसने लगे जब मैंने ये बोला की वो तो सरकार थे उनके पास तो पैसे बनाने की मशीन लगी है इसलिए उनसे मैंने पैसे मांग लिए अब इसके लिए क्यूँ डांट पड रही है ?
उस दिन मुझे समझाया गया पैसे बनाने वाली मशीन तो सरकार के पास है लेकिन सरकार कोई आदमी नहीं है वो व्यवस्था है और ऐसे सरकार भी मन माने ढंग से पैसे नहीं बनाती उसकी भी एक प्रकिया है उसके हिसाब से पैसे बनाये जाते हैं.
बचपन की बातें तो ऐसी ही होती हैं लेकिन क्या आप ने कभी नहीं सोचा की काश आपके पास पैसे बनाने वाली मशीन होती. अगर आप के दिमाग में ऐसी बाते हैं तो आगे जरुर पढ़िये...आप कैसे पैसे बनाने वाली मशीन अपने घर में ला सकते हैं ?
वैसे इसका अविष्कार किसने किया था इसके बारे में किसी को पता नही लेकिन इस मशीन को विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन ने दुनिया का सबसे बड़ा अविष्कार माना था और इसके बारे में उन्होंने कहा था .
" यह दुनिया का सबसे बड़ा अविष्कार है"
" यह दुनिया की सबसे ताकतवर चीज है "
"यह सापेक्षता (रिलेटिविटी) सिद्धांत से ज्यादा जटिल है "
"यह दुनिया का आठवां आश्चर्य है, जो लोग इसकी ताकत समझते है वो कमाते हैं और जो नहीं समझते वो चुकाते हैं "
इस मशीन की ताकत का अंदाजा पुराने समय में लोगों को था इसी लिए इसको कई देशों ने प्रतिबंधित किया हुआ था. अरब देशों में तो इसको उपयोग करने वाले को मृत्यदंड की भी सजा थी.
इस मशीन के अविष्कार में आपके पुर्वजों का भी योगदान है इसलिए 500 साल पहले जब वास्कोडिगामा भारत आया था तो आप के लिए एक गिफ्ट रख कर गया था और वही गिफ्ट देने के लिए कुछ लोग आपको खोज रहे हैं.
सच में भाई...आप ही को ढूंढ रहे हैं.
क्या आप जानते हैं की वास्कोडिगामा इंडिया कब आया था, जी सही कहा आपने सन 1498 में. वास्कोडिगामा भारत की धरती पर कदम रखने वाला पहला यूरोपियन था. वास्कोडिगामा ने उस समय के सबसे धनी साहूकार को 1 पैसा दिया था और बोला था इस पर 8% सालाना चक्रव्रिधि ब्याज की दर से पैसे जोड़ते रहो और इस पैसे को सन 2016 में उसके भारत खोजने के 518 साल पूरे होने पर आपको (मतलब आपको ही ) ब्याज सहित गिफ्ट के रूप में सारे पैसे दे दिए जायें क्यूंकि आपके पुर्वजों का भी योगदान था पैसे बनाने की मशीन के अविष्कार में.
अब आज उस साहूकार के वंशज, आपको पैसे ले कर ढूंढ रहे हैं और वो आपको आपकी अमानत वापस करना चाहते हैं.
मगर ये क्या बोल रहे हैं आप ? आपको पैसे नहीं चाहिए...
मगर क्यूँ ???
अच्छा-अच्छा 1 पैसे ले कर आप क्या करेंगे ?
सही कह रहे हैं 1 पैसे की कीमत आज क्या है ?
लेकिन सुन तो लीजिये ये पैसे कितने हैं.....
1 पैसे नहीं हैं....8% का सालाना ब्याज भी है भाई....
कितना 100 रुपये हुआ....नहीं भाई.....इस से कहीं ज्यादा....कितना??? 10000 रुपये
कितना कम सोच रहे हो आप...
अच्छा ..... 1 लाख....10 लाख....1 करोड़...
चलिए कैलकुलेटर पर निकाल लीजिये...अपने पैसे का हिसाब तो हर आदमी को रखना चाहिए
क्या??? कैलकुलेटर से नहीं निकल पा रही है वैल्यू
अच्छा चलिए हम ही बता देते हैं....
अरे नहीं इसे इतनी जल्दी नहीं जोड़ा जा सकता 518 सालों का हिसाब है थोडा टाइम लगेगा .....कल तक का समय दीजिये कल आपका हिसाब भी बता दूंगा और पैसे बनाने वाली मशीन के भी बारे में बता दूंगा.
तब तक के लिए धन्यवाद.
अगले ब्लॉग में जानिए पैसे बनाने की मशीन आप अपने घर में कैसे लगा सकते हैं ?
